बहुत दिनो के बाद आज आपसे मुखातिब हुये हैं......आज एक शेर...
गालिब का एक शेर याद आ रहा है.....................
हम कहां के दाना थे किस हुनर में यकता थे
बेसबब हुआ दुश्मन गालिब आसमां अपना।
हुई मुद्दत कि गालिब मर गया पर याद आता है
वो हरेक बात पर कहना कि,यूं होता तो क्या होता।
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Sunday, September 16, 2007
गालिब का एक शेर...........
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1 टिप्पणियाँ:
बहुत लंबे समय बाद आये हैं. अब जारी रखें लेखन. शुभकामनायें.
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