हंसी एक रोज मैने तन्हा देखी
मैं कुछ पूछता, उससे पहले ही
आंखों में उमड़ता सैलाब,
उपेक्षा की सारी कहानी बयां कर रहा था
और स्वयं पूछ रहा था
ऐसा क्यों ? ऐसा क्यों ?
मैं निशब्द , निरुत्तर,
बस सोच रहा था ऐसा क्यों ?
Saturday, March 31, 2007
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