Wednesday, May 2, 2007

है दर्द मेरे दिल में.....

है दर्द मेरे दिल में , लबों पे ये हंसी हैं ,
अंधेरों का सफर है, ना कोई रोशनी है।
वक्त है कि कभी हमसफर ना बन सका
जिंदगी बस यूं ही जिंदगी है,

अंधेरों की तन्हाइयां है कि मै सफर में हूं
गमों की खामोशियां है कि मै सफर में हूं
हद तलक तेरा साथ निबाहुगां जिंदगी
दफ्न की तैयारियां है कि मै सफर में हूं॥

2 टिप्पणियाँ:

मोहिन्दर कुमार said...

सुन्दर रचना है..

अगर है दिल में तो दर्द तो, दर्द की दवा करो
जलते है पांव गर, तो ना आग पर चला करो

kbhi kabhi said...

धन्यवाद